• Yashwant Vyas Archive

कातिलों के कातिल

क्या आपने कभी कार के नीचे कुत्ता मारा है? और आपको दुख हुआ है? जो लोग, फुटपाथ पर सोए हुए लोगों पर प्यार में डूबे हुए कार चढ़ा ले जाते हैं, वे दुखों की चार्जशीट बनाते-बनाते नायक हो जाते हैं। उसके बाद कुल मिलाकर कत्ल एक दिलकश शब्‍द है।

killer

कत्ल मोहक मनोहर कार्यक्रम होता है। जो कातिल है, उनके लिए जीवन अमूल्य है। वे जब किसी का कत्ल करते हैं, तो अपने जीवन को ऊपर उठा रहे होते हैं। जब भी कोई समझदार कातिल कत्ल करता है, तो और समझदार हो जाता है। उसकी समझदारी के गमले में चार फूल और उग आते हैं। फूलों की वैरायटी गवाहों के बदलने की तरह मादक होती है। वह उन्हें शाहजहां की तरह हाथ में लेता है और अदालत चला जाता है।

अच्छे खून अनायास हो जाते हैं। जैसे बॉलीवुड में कई दफे बगैर विदेशी नकल किए कोई धुआंधार फिल्म बन जाती है। कुछ खून लगते शानदार हैं, लेकिन रहस्य-रोमांच को संभाल नहीं पाते। नतीजतन सरकारी हवालातों की मौत की तरह आभाहीन साबित होते हैं। कभी-कभी किसी कत्ल से आप बहुत आशाएं पाल बैठते हैं।

आपको लगता है कि अब मजा आएगा, अब केस घूमेगा लेकिन उसकी गति मुठभेड़ में मारे गए बदमाश को प्राप्त हो जाती है। आप निराश हैं, उम्मीद से हैं लेकिन कत्ल जो है, किसी काम का न रहा, रोइये, फिर कोई नया कत्ल खोजिए।

खून के व्यवसाय में एक चालू प्रश्नावली बंटती है। उसमें भिन्न-भिन्न ‘एफ ए क्यू’ उर्फ ‘फ्रीक्वेंट आस्‍क्ड क्वेश्चन्स’ यानी ‘बारंबार वही जिज्ञासा’ की श्रेणी होती है। इसमें चश्मदीद गवाह, हथियार के प्रकार, हत्या का करारनामा, हत्या के बाद की सावधानियां, हत्या के पश्च प्रभाव आदि समझाए गए हैं।

इसमें वह शब्दावली भी दी गई है, जो गाहे-बगाहे व्यवसाय चलाने के काम आती है। इसमें सुपारी के बारे में कहा गया है कि यह फल दांतों-आंतों के लिए बहुत गुणकारी है। भाव प्रकाश निघंटु के संदर्भ से बताया गया है कि इसमें कीड़े मारने तथा पाचन प्रणाली ठीक करने के गुण एक साथ निहित हैं।

कातिलों को इसीलिए हत्या करने के ठेके जब मिलते हैं, तो सुपारी देना कहा जाता है। उससे वे चबाने, तोड़ने, पचाने आदि की शक्ति प्राप्त करते हैं। कुछ व्याकरणाचार्य इसमें सूप और आरी का तालमेल भी खोज लेते हैं। हत्यारा मजे में सूप पीकर अच्छी तरह आरी चला सके, यह सुपारी का गुढ़ार्थ है।

बहरहाल, हत्या के कारोबार से न सिर्फ देश का मनोरंजन होता है, बल्कि जीवन में जादू की महत्ता का भी पता चलता है। एक सुप्रसिद्ध बीएमडब्‍ल्यू केस चल रहा था। कहते हैं इसमें जो भी कभी हत्यारी कार थी, वह बाद के दिनों में ट्रक में बदल गई।

इससे पहले एक प्रसिद्ध हत्या का इतना सा लाभ हुआ कि खून के धब्बे और उनकी धुलाई का सुंदर काम करने वाले हाथों से फैशन डिजाइनरों को गुप्त प्रेरणा प्राप्त हो गई। सीबीआई इस मामले में नए-नए दिलकश संस्करण प्रस्तुत करने की कृपा करती रही है।

हत्या का सबसे शानदार पक्ष यह है कि उसकी योजना, योजना आयोग नहीं बनाते। अगर ऐसा होता तो हत्यारों का विकास उबाऊ और धीमा होता फलतः सारा कारोबार श्रीहीन हो जाता। देश के विकास से अच्छी राजनीतिक सभ्यताएं समझौता कर सकती हैं। कत्ल के कारोबार से नहीं।

खून ऊब विरोधी, सनसनी प्रेमी तथा लोकप्रियता के मानदंडों पर खरा उतरने को आतुर महानों का खेल है। इसलिए दहेज वाले खून, आपसी कलह वाले खून या चोरी-चकारी के दौरान हो गए खून अमूमन इज्जतदार नहीं होते। शातिर कातिलों का मैनुअल कहता है कि हत्या में घुमाव होना चाहिए, भव्यता होनी चाहिए, लंबे समय तक जिज्ञासा जगाए रखने के तत्व होने चाहिए।

बेबी किलर, कनपटीमार, सीरियल किलर वगैरह भी इनमें से एकाध तत्व की ही पूर्ति कर पाते हैं। चार्ल्स शोभराज जैसे आदरणीय प्रेरणास्रोतों से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने वाले हत्या-पंडितों की राय है- हत्या वही जो हीरो बनाए। कानून ठीक से बने हैं कि नहीं, इसकी परीक्षा करके अच्छे हत्यारे संवैधानिकतंत्र की समीक्षा का महान काम करते हैं।

कत्ल की दुनिया में सबसे शानदार टिप यह है कि उसे दिलकश होना चाहिए। अगर राजघराना है, प्रेम है, साजिश है और संघर्ष है, तो कत्ल की ऊंचाई एकदम बढ़ जाती है। वह एक्सक्लुसिव हो जाता है। उसके अपने रस, अपनी ब्रांडिंग, अपनी कीमत, अपनी रंगत होती है।

जनता और सत्ता के बीच दो कौड़ी के हत्यारे अचानक करोड़ों के दलाल में बदल जाते हैं। जो इस लाइन में जाना चाहते हैं, उन्हें हत्या-आत्महत्या में भ्रम पैदा करने में महारत पानी चाहिए। गोली चलाई गई, चलवाई गई या दुर्घटनावश चल गई- इसमें खेल करना आना चाहिए। ऐसे शाही खिलाड़ी देश-दुनिया में खेल कर सकते हैं। वे इतने ऊपर उठ जो गए हैं कि बाकी हत्यारे चिरकुट दिखाई देते हैं।

श्रेष्ठ हत्याएं उपन्यास लिखने के काम आती हैं, देश की तकदीर लिखने के काम आती हैं, देश की तकदीर को उपन्यास बनाने के काम भी आ जाती हैं। सफल हत्याएं अकेले आती हैं, लेकिन लाखों को अपने साथ ले जाती हैं। भयंकर सौन्दर्य बोध हत्या में सफलता की कुंजी है। जिन्हें हत्या के कारोबार में जाना होता है, उनका सौंदर्य बोध बहुत विकसित होता है। यदि हम ऐसे हत्यारों का सफाया करना चाहें तो ऐसा भयंकर, ऐसा सुंदर बोधितत्व चाहिए। क्या यह आपके पास है? यदि हां तो आप ये टिप्स क्यों पढ़ रहे हैं?

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