• Yashwant Vyas Archive

हाफिज सईद बड़े काम की चीज है


hafiz vaidik

एक पान वाले मित्र हैं। उनके यहां कई तस्वीरें लटकी हुई हैं। कोई मशहूर आदमी उधर से गुजरा नहीं कि तस्वीर खिंची और दुकान पर टंग गई। फलां मुख्यमंत्री जब मुख्यमंत्री नहीं थे, तब से यहां पान खाते रहे हैं। आप देख रहे हैं कि उनके गले में हार डालती तस्वीर से पान वाले साहब झांक रहे हैं। एक भजियेवाले भी थे, जिन्होंने जीवनभर एक ही नेता के साथ अपनी तस्वीर टांगे रखी। भजियों के साथ वे पार्टी, पॉलिटिक्स और लीडर की व्याख्या फ्री दिया करते थे। उन्हें लगता था, इस तरह वे जीभ के स्वाद और लोकतंत्र की शक्ति दोनों में बराबरी का योगदान दे रहे हैं।

आमतौर पर इन दोनों मित्रों का यह आनंद भाव सिर्फ ग्राहकों की संतुष्टि और टंगी हुई तस्वीर के गर्व से पूरा हो जाता था। भजियेवाले कभी नेता नहीं बने और पान वाले कभी टिकट मांगने के चक्कर में नहीं पड़े। दरअसल वे ऐसी छोटी चीजों से ऊपर उठ चुके थे।

दोनों ही अब दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद के साथ फोटो खिंचवाना चाहते हैं।

‘आप अचानक हिंदुस्तान के दुश्मनों के साथ तस्वीर खिंचवाने पर क्यों उतर आए हैं?’ मैंने पूछा।

‘मैं पुराने नेताओं की तस्वीरों से बोर हो चुका हूं। कुछ तस्वीरें तो ऐसी हैं कि उन्हें देखकर लोग परेशान हो जाते हैं। कुछ नए लोग इन तस्वीरों की वजह से आना बंद हो गए हैं, क्योंकि उन्हें लगता है जिनकी टंगी है वे खुद तस्वीर हो चुके हैं। मैं इस माहौल को बदलना चाहता हूं। मैं अब राजनीति से ऊपर उठना चाहता हूं। अभी-अभी पता चला है कि दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद का मार्केट ज्यादा ठीक है।’ पान वाले ने कहा।

‘सवाल सिर्फ मार्केट का नहीं है’, भजिये वाले ने स्पष्ट किया, ‘सवाल उच्च नैतिक मूल्यों का है।’

‘क्या ये लोग राजनेताओं से ज्यादा काम की चीज हैं? क्या आतंकी हाफिज और दाऊद के साथ तस्वीर लटक गई, तो आपकी नैतिकता ज्यादा ऊपर उठ जाएगी?’ मैंने सवाल किया।

उत्तर भजिये वाले ने दिया, ‘सवाल यह है कि हम कितने उच्चतर मानवीय हैं। देशों की सीमाएं नेताओं के लिए हैं, दिलों के लिए नहीं। दाऊद का फोटो हो तो, मैं कह सकता हूं कि मैंने उसे पाकिस्तान में जाकर भजिये खाने के लिए आमंत्रित किया है। मैं उसकी आत्मा को जगाना चाहता था। मेरे भजिये आत्मा जगाने वाले गरमा-गरम भजिये हैं। कितनी सुंदर परिकल्पना है। क्या गजब ब्रांडिंग है। यही चीज हाफिज के साथ और भी जोरदार तरीके से संभव है।’

पान वाले ने कहा, ‘मैं हाफिज सईद को क्रोध, घृणा, हिंसा, सांप्रदायिकता, आतंक आदि से ऊपर जाकर देखता हूं। अंतत: वह भी एक मानव है। प्रत्येक मानव को पान खाना चाहिए और उसके घुलते स्वाद, फैलती महक से जीवन सुंदर बनाना चाहिए।’

‘बड़ी विचित्र बात है,’ मैंने कहा, ‘भारत के खिलाफ दिन रात जहर उगलने वाले, साजिश करने वाले, आपके भजिये खाकर पेट पर हाथ फिराएंगे और पान चबाएंगे? उनकी फोटो लटकाकर आप अपनी ब्रांडिंग करेंगे?’

‘हम वैसे भी सिर्फ बेचते हैं। अपनी दुकान पर आने वाले का आइडेंटिटी कार्ड चेक करके माल नहीं देते। कितनों ने ही खाया होगा, कितनों ने ही उसके बाद न जाने क्या किया होगा।’ भजिये वाले ने तर्क दिया।

‘तो क्या देश के प्रति आपकी कोई जवाबदारी नहीं बनती?’

‘हम मामूली आदमी की तरह सीमाओं में बंधकर नहीं सोचते। हम देश से ऊपर सोचते हैं। समूचा विश्व भजिये खा सकता है, समस्त ब्रह्मांड हमारे पान का अधिकारी है। हम, हमारे भजिये, हमारे पान और पूरा जहान।’

‘हाफिज सईद आपका पान खाकर कहे कि कश्मीर अलग कर दो। मुंबई में बम फोड़ दो तो पान की दुकान का क्या होगा? भजिये खाने के लिए कौन बचा रहेगा?’ ‘आप नादान लगते हैं। आपको हाफिज के साथ हमारी भावी तस्वीर पर तकलीफ हो रही है। मेरे यहां जिन पूर्व मुख्यमंत्री की तस्वीर में हार लटकाए साथ दिखता हूं, उन पर हजार करोड़ के घोटाले का आरोप है, पर अतिक्रमण हटाने जब भी कोई आया, दुकान पर उनका फोटो देखकर मेरी गुमटी बिना छुए निकल गया। मैं उनके साथ जीवन में सिर्फ कुछ सैकंड की तस्वीर के लिए रहा, लेकिन गुमटी सालों से बची हुई है। क्या तस्वीर और मुलाकात का सिद्धांत आपको समझाने के लिए काफी नहीं है?’ ‘यानी आप आत्मा जगाने नहीं, गुमटी चलाने के लिए तस्वीर कबाड़ना चाहते हैं?’

हमारी बहस तेज होती जा रही थी। लोग इकट्ठे होते जा रहे थे। जिन्हें पता नहीं था, वे भी अब जान गए थे कि श्रेष्ठ भजिये का दावा किसका बनता है और तार्किकता के पान की गुमटी का मालिक कौन है। सईद का जो हो सो हो, हिंदुस्तान में जो घटे सो घटे, दाऊद जो करे सो करे, भजियेवाले और पान वाले को तो उनके साथ एक फोटो चाहिए।

भीड़ बढ़ गई है। भीड़ हाफिज और दाऊद पर पान-भजिया छाप बहस कर रही है। पता ही नहीं चला, दोनों कब भीड़ से गायब हो गए हैं। दोनों सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर डालने गए हैं। देश का हिसाब आप जानें, वे तो हीरो होने को हैं।

और अंत में… साहब को उनकी बीवी ने कई सारी चीजों की सूची सुनाई और पाकिस्तान रवाना करते हुए कहा, तुम्हारे रुमाल में गांठ लगा रही हूं, ताकि आतंकवाद से लेकर बम तक कुछ न भूलो, सब याद रहे।

तय दिन से पहले ही साहब अचानक घर लौटे। बीवी ने पूछा, सब कर आए? साहब ने कहा, ‘अब क्या कहूं, लाहौर उतरा तभी से समझ में नहीं आ रहा, बीच में यह जानने को लौट आया हूं कि इस रुमाल में गांठ किसने बांधी थी?’

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