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उस किताब में एक रॉयल्टी रहती थी
पांच महीने में पांच लाख कॉपी हों और बारह रिप्रिंट, उसके बावजूद सारा मुनाफा एक ही जेब में कैसे जा सकता है? ऊपर से इसकी क्या गारंटी है कि रिप्रिंट और संख्या सही-सही जाहिर की जा रही है? एक प्रकाशक हजार टाइटल छापता है। हर एक ‘प्रोजेक्ट’ दरअसल बाजार में उसका व्यापारिक निवेश होता है, […]
Yashwant Vyas
Oct 5, 20258 min read


छावा के वक्त में पूरब और पश्चिम
अब जब नए-नए भारत कुमार बन रहे हैं और अस्सी के दशक में छपे शिवाजी सावंत के उपन्यास ‘छावा’ की फिल्मी कामयाबी पर 2025 में रुदन और हर्ष एक साथ आसमान छू रहे हैं, मनोज कुमार के उस चित्र को देखना कितना सुकून देता है, जिसमें वे शहीद भगतसिंह की मां विद्यावती जी के साथ मुस्करा […]
Yashwant Vyas
Apr 5, 20255 min read


फिर एक सुंदर सी कथा कहें
जो कहानी हम बनाते हैं, वही हमें बनाती है। इसके जरिये ही हम दूसरे के जीवन में प्रवेश करते हैं, उसके चरित्र में उतर सकते हैं, उसके अनुभवों को जीकर वापस अपने में लौट सकते हैं। इसीलिए कथाएं हमारे विश्वास भी गढ़ती हैं। हमारी संवेदनाओं के नक्शे उनसे धड़कते हैं। हर साल हम कुछ कथाएं जीते […]
Yashwant Vyas
Dec 29, 20244 min read


सीजन के सौदागर आते रहेंगे
तितलियों के प्रेम में पड़कर उनके पीछे भागना एक बात है और उन्हें मारकर अपनी किताब के पन्नों में रख लेना दूसरी। मरी हुई तितलियां अपने रंगों से कभी नहीं खेलतीं, उनके कण जरूर जिंदगी के पन्नों पर चिपके पड़े रह जाते हैं। ये कण अब खूब चमक रहे हैं। सादगी से भरा आनंद जटिलता की […]
Yashwant Vyas
Dec 31, 20236 min read


आदिपुरुष विवाद: सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा
हर आदमी के अपने राम, अपने रावण हो सकते हैं, पर रामायण की मूल कथा में ‘अपना मजा’ बेचने की कोशिश कला का भिन्न विचार है। एक साथ श्रद्धा और मजा बेचना आखिर टेढ़ा काम तो है ही। फिल्में पॉपुलर कल्चर का हिस्सा हैं और अमूमन यह उम्मीद की जाती है कि वे […]
Yashwant Vyas
Jun 21, 20234 min read


New Year 2023: अंतिम अध्याय कभी नहीं लिखा गया
कोई अंतिम अध्याय कभी नहीं लिखा गया, क्योंकि हर बार कुछ नया लिखा जाना बाकी होता है। तो, नए साल में क्या यह संकल्प बेहतर न होगा कि कुछ संकल्प अधूरे ही रह जाएं। वास्तविक संसार में संपूर्णता नहीं बसती, वह केवल मनुष्य के दिमाग की उपज है – नोबुआ सुजूकी नया साल शुरू होने […]
Yashwant Vyas
Jan 1, 20236 min read


प्रतिपक्ष की सेल्फी
इस दौरे सियासत का इतना सा फसाना है बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है अभी कुछ ही वक्त पहले की बात है। एक उम्मीदवार मंच से खड़े-खड़े ऐलान...
Yashwant Vyas
Mar 31, 20223 min read


मरने पर लिखना...
हमारे सुन्न पैर बर्फ में धंसे हैं, खबर का चाकू तलुए में लगा है, तंत्रिकाएं गुम हैं। उनके पास जाइए, आपको लगेगा कि वाह, क्या गजब मौत है!...
Yashwant Vyas
May 23, 20213 min read


हम अमर नहीं हैं लेकिन...
साल दूसरा है, लेकिन वक्त पहले से सख्त है। कई चेहरे इस आंधी के थमने तक जिंदगी के पेड़ से झड़ चुके होंगे। सूखे पत्तों और कर्कश बहसों की...
Yashwant Vyas
May 2, 20213 min read


#हैशटैग से कौन डरता है?
डाटा की तानाशाही से क्या कोई ‘हैशटैग’ व्यवस्थाओं को तहस-नहस भी कर सकता है? ट्रोल, ब्लॉक, अधिकार और तख्तापलट की उसकी सत्ता होगी। तब किसकी...
Yashwant Vyas
Feb 14, 20214 min read


एक मौत, हजार दीवाने…
इतिहास में जाने के लिए गलतियां भी ऐतिहासिक होनी चाहिए। एक होती है छुरी और एक होती है सोने की छुरी। सोना दूसरे को न मिल जाए, इसलिए कुछ लोग
Yashwant Vyas
Sep 13, 20204 min read


ये किस देश-प्रदेश के आदमी हैं?
इसी देश में, इस प्रदेश से उस प्रदेश की सीमा पर गिराए जाते भग्न स्वप्नों के विराट अवशेषों की तरह इनके लिए धरती पीली पड़ गई है और आकाश...
Yashwant Vyas
May 21, 20204 min read


विलक्षण एकांत
रियो ने कहा, यह बकवास है। अगर कोई अपने सुख को ज्यादा पसंद करता है तो उसे शर्म नहीं महसूस करनी चाहिए। यह तो सही है, रैम्बर्त ने जवाब दिया,...
Yashwant Vyas
Mar 22, 20204 min read


स्वयंसेवक की बाजी
इच्छाशक्ति और अनिर्णय के बीच बहुत ज्यादा दूरी नहीं होती। राजनीति में तो कई बार यह बात दिलचस्प शक्ल ले लेती है। कुछ चीजें इच्छापूर्वक...
Yashwant Vyas
Aug 6, 20194 min read


बहुजन राजनीति का काला
कलाओं की भी अपनी राजनीति होती है और विभिन्न कलारूपों में उसे लक्ष्यपूर्ति के लिए उतारा जा सकता है। इसीलिए पार्टी का साहित्य, विचारधारा के...
Yashwant Vyas
Jun 11, 20184 min read


नर्क की उक्तियां
बदला लेने की कोई जरूरत नहीं। बस शांति से बैठो और इंतजार करो। तुम्हें दुख देने वाले खुद-ब-खुद निपट जाएंगे। अगर तुम्हारी किस्मत अच्छी है,...
Yashwant Vyas
Aug 30, 20154 min read


किसके जूते, किसके पैर
अक्सर जूतों के बारे में बात करने पर जूतमपैजार जैसा भाव आ जाता है। ऐसा लगता है, जैसे जूते का काम आपके चरणों को कमल बनाए रखने का नहीं, किसी...
Yashwant Vyas
Aug 23, 20154 min read


गुनाह इस अर्थशास्त्र की किक है
वह क्या बात है, जो एक सेलिब्रिटी को इतनी दोहरी तार्किक प्रतिरक्षा देने वाला उत्सुक तंत्र तैयार कर रही है? उफनाऊ पूंजी के स्मार्ट...
Yashwant Vyas
May 6, 20154 min read


तुम डबरे हम सागर
तुलना करना साहस का काम है। प्रेम में अपना सबसे सुंदर, विलक्षण और अद्वितीय ही लगता है। वह अद्वितीय तो खैर होता ही है क्योंकि एक जैसा एक ही...
Yashwant Vyas
Apr 6, 20154 min read


उम्मीद की फ्रेंचाइजी नहीं बिकती
हंसने वाले कौन लोग हैं? लंबे-लंबे हाथ करके और गर्दन घुमाकर ज्ञान देने वाले कौन लोग हैं? मंद-मंद मुस्काते और ‘स्टिंग के बारे में स्टिंग...
Yashwant Vyas
Mar 28, 20154 min read
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